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रुड़की के बारे में

इतिहास : रूड़की की प्राचीनता के अनुसार इसका नाम एक राजपूत मुखिया की पत्नी रूड़ी के नाम पर रखा गया । सहारनपुर गजट के सन 1887 के संस्करण में रूड़की को रूड़की के रूप में उच्चारित किया गया था । अबुल फजल की पुस्तक आइने-अकबरी के अनुसार रूरकी अथवा रूड़की सम्राट अकबर के परगना (महल) की राजधानी थी । जबीता खान के शाषन काल में इसके क्षैत्र को घटाकर एक नये क्षैत्र शकरौदा की स्थापना की गयी जो राव कुतुब उददीन की जागीर थी । अठारवीं सदी के मध्य में इसे गुर्जरों की रियासत लंढौरा(रूड़की के समीप) में शामिल कर दिया गया । यह राजा रामदयाल की मृत्यु(1813) तक गुर्जरों की रियासत में ही शामिल रहा । ब्रिटीश अधिग्रहण के दौरान यह केवल मिट्टी के घरों से बना हुआ एक साधारण गांव हुवा करता था । रूड़की के मौजूदा रूप का विकास सन 1840 में गंगा नहर के निर्माण के साथ प्रारम्भ हुआ । तद्पश्चात इंजीनीयरिंग वर्कशाप, चर्च, स्कूल, इंजीनीयरिंग कालेज व छावनी की स्थापना के बाद बहुत तेजी से इसका विकास होने लगा । सोलानी नदी के पानी को गंगा नहर के दूसरी तरफ ले जाने के लिये सोलानी जलसेतु का निर्माण 150 वर्ष पहले किया था, जो यहां से एक किलोमीटर से भी कम की दूरी पर स्थित है, जो कि इंजीनीयरिंग का एक नायाब नमूना है ।

स्थिति : रुड़की, राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच)-58 (दिल्ली-हरिद्वार/देहरादून-श्री बद्रीनाथ-माना पास) तथा एनएच-73(पंचकूला/चंडीगढ़-यमुना नगर-रूड़की) पर स्थित है। रुड़की उत्तर रेलवे के अधिकार क्षैत्र में आता है तथा भारत के प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, भोपाल, ग्वालियर, आगरा, उज्जैन, इंदौर, धनबाद, पटना, जम्मू, पुरी, अमृतसर, देहरादून इत्यादि से शताब्दी, जन.शताब्दीए मेल / एक्सप्रेस और शटल / पैसेंजर आदि रेलगाड़ी द्वारा जुड़ा है।

 

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